बतख पालन का व्यवसाय कैसे शुरु करें?

Duck Farming Business Plan In Hindi: किसी व्यवसाय प्रारंभ परामर्श की श्रेणीं में अब हम आपको बताने वाले हैं कि डक फार्मिंग अर्थात बतख पालन का व्यवसाय कैसे प्रारंभ करें? अब सवाल यह उठाता है कि मुर्गी पालन, बकरी पालन, मछली पालन इत्यादि के होते हुए बतख पालन व्यवसाय का ही परामर्श क्यों? तो हम आपको बता दें कि हम हमेशा आपको कुछ ऐसे व्यवसाय करने का परामर्श देते हैं जो कम से कम लगत या पूँजी को लगाकर ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा देता है, यानी कि ‘आम के आम और गुठलियों के दाम’।

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Image : Duck Farming Business Plan In Hindi

तो आज इस लेख में हम आपको बताने वाले हैं बतख पालन व्यवसाय को प्रारंभ करने के सभी चरण जैसे: व्यवसाय प्रारंभ के लिए कितनी पूँजी व निवेश की आवश्यकता होगी, कितना व कैसा स्थान चुनें, क्या किसी कच्चे माल की भी आवश्यकता होगी; यदि हां तो वह क्या है और कहां से व किस लगत में प्राप्त करें, क्या  मशीनें या व्यावसायिक संपत्तियों की आवश्यकता होगी, कितने सहयोगियों या स्टाफ की आवश्यकता होगी।

किन उत्पाद की पैकेजिंग तथा मार्केटिंग की व्यवस्था कैसे करें, उत्पाद को कहाँ व कैसे बेचें, इस व्यवसाय को करने के लिए किस तरह के पंजीकरण या लाइसेंस की भी आवश्यकता होगी, इस व्यवसाय में क्या-क्या रिस्क हो सकते हैं तथा इस व्यवसाय में मुनाफ़ा कितना हो सकता है आदि।

अंत में इस व्यवसाय के सभी पहल्लुओं को सम्मिलित रूप में सामने रखेंगे ताकि आप किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकें एवं व्यवसाय को करने या न करने के संबंध में किसी निर्णय तक पहुँच सकें व साथ ही इस व्यवसाय को प्रारंभ करते समय अधिकांशतः मन में आने वाली दुविधाओं का भी समाधान करेंगे।

बतख पालन का व्यवसाय कैसे शुरु करें? | Duck Farming Business Plan In Hindi

बतख पालन का व्यवसाय कैसे शुरू करें?

बतख पालन का व्यवसाय करना बहुत ही आसन है तथा यह मुर्गी पालन से अधिक फायदेमंद भी है क्योंकि मुर्गी पालन कि अपेक्षा बतख पालन में इनपुट कम लगाना होता तथा इसका आउटपुट भी अपेक्षाकृत अधिक होता है।

इस व्यवसाय का कच्चा माल तथा मूल सामग्री सभी कुछ बतख ही है और अन्य व्यवसायों की तरह बतख के रखरखाव के लिए कोई विशेष स्थान को लीज़ पर लेने की आवश्यकता नहीं है। अतः स्थान प्रबंधन का खर्चा व उसके मेंटेनेंस की मेहनत आपकी बाख जाती है। संक्षेप में आप किसी अतिरिक्त स्थान के बिना भी यह व्यवसाय कर सकते हैं।

यह व्यवसाय आप प्रारंभ में कम से कम बतखों अर्थात लगभग 20-30 बतखों के साथ भी प्रारंभ कर सकते हैं तथा बाद में आगे चलकर मुनाफ़ा होने पर बतखों की संख्या बढ़ा भी सकते हैं। प्रारंभ में पैकेजिंग तथा डिस्ट्रीब्यूशन व विक्रय का काम भी स्वयं ही या परिवार के ही सदस्यों की मदद से कर सकते हैं।

संक्षेप में प्रारंभ में आपको यह व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए सिर्फ़ कुछ बतखें, उनके लिए पर्याप्त भोजन, उनके अण्डों को पैक करने का बेहद बेसिक मटेरियल तथा उनको मार्केट तक पहुचने के लिए एक साधन की ही आवश्यकता होगी।

बतख या बतख के उत्पाद के प्रकार

बाज़ार में बतख व बतख के अण्डों के कुछ प्रकार हैं। वास्तव में यह वर्गीकरण उपभोक्ताओं की रूचि के कारण माना जाता है। कुछ उपभोक्ता ओर्गानिक अंडों की मांग करते हैं, तो कुछ हाइब्रिड की तो, कुछ सस्ते अंडों की फिर चाहे वे किसी भी वर्गीकरण में आते हों।

असल में इन सभी तरह के उत्पादों का पोषण मूल्य व स्वाद पृथक होता है। इसीलिए इन उत्पादों के बाज़ारों में वैभिन्य विद्यमान हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं इन वर्गीकरणों को विस्तार से ताकि आप भी मार्केट व उपभोक्ताओं व मांग को समझ सकें तथा अपने व्यवसाय को एक निश्चित दिशा दे सकें।

बतख व बतख उत्पादों के प्रकार:

  • नस्ल के आधार पर
  • उन्नत नस्ल: ये बतखें अधिक स्वस्थ होती हैं तथा ये अपेक्षाकृत अधिक अंडे देती हैं तथा इन अंडों का वज़न व आकर भी अपेक्षाकृत उनत ही होता है।
  • सामान्य नस्ल: ये बतखें सामान्य स्वस्थ्य वाली ही होती हैं तथा इनके अंडे भी एक औसत दर पर तहत औसत वज़न व आकर वाले ही होते हैं।
  • रसायन / विशुद्धता के आधार पर
  • ऑर्गेनिक: इन बतखों के अंडे शत प्रतिशत प्राकृतिक व रसायन मुक्त होते हैं। इनके अंडें सिंथेटिक नहीं होते क्योंकि इन बतखों को किसी प्रकार का कोई इन्जेक्शन देकर कृत्रिम पोषण नहीं दिया जाता और ना ही कृत्रिम रूप से इन्हें परिपक्व किया जाता है।

इन बतखों को प्राकृतिक वातावरण में रखा जाता है तथा इन्हें प्राकृतिक तरीके से उनकी रूचि का भोजन गृहन करने दिया जाता है तथा इन्हें प्रताड़ना मुक्त वतावरण में रखा जाता है ।

इंजेक्शन युक्त: ऑर्गेनिक विचारधारा के विपरीत इन बतखों के अंडे रसायन युक्त होते हैं। इनके अंडें सिंथेटिक होते हैं क्योंकि इन बतखों को इन्जेक्शन देकर कृत्रिम पोषण दिया जाता और कृत्रिम रूप से इन्हें परिपक्व किया जाता है।

इन बतखों को प्राकृतिक वातावरण में आवश्यकता व सुविधा अनुसार ही रखा जाता है तथा इन्हें प्राकृतिक तरीके से उनकी रूचि का भोजन गृहन करने का अवसर नहीं मिल पता है तथा इन्हें लागत व सुवधा को प्राथमिकता देने के कारण एक अप्राकृतिक वातावरण तथा उपलब्ध स्थान पर रखा जाता है चाहे वह इन पक्षियों के पक्ष में हो या नहीं व स्वास्थ्यकारक हो या नहीं।

तो इस प्रकार हम देखते हैं कि अपनी लगत व पूँजी के अनुरूप ही हम किसी मार्केट विशेष के लिए उत्पाद तैयार कर सकते हैं। यह विवरण पढ़ कर आप अपने व्यवसाय के उत्पाद का वर्गीकरण अपने वित्तीय योग्यता के आधार पर निर्धारित कर सकते हैं।

बतक की बाजार में मांग

बाज़ार अनुसन्धान की मानें तो अन्य फार्मिंग या पालन व्यवसाय की तुलना में बतख पालन  एक श्रेयस्कर निर्णय है। अनुसन्धान के अनुसार बतख पालन में मुर्गी पालन के मुकाबले लगभग दुगने के बराबर मुनाफ़ा होता है। जहां मुर्गियों के अंडें 60-65 ग्राम के होते हैं वहीं बतख के अंडे 60-75 ग्राम तक के होते हैं। तथा जहां एक साल में एक औसत मुर्गी 175-230 अंडे देती है वहीं एक औसत बतख 280-320 तक अंडे देती है।

बतख पालन व्यवसाय के लिए कच्चा माल

बतख पालन के व्यवसाय में कच्चा माल का अर्थ स्वयं बतख ही हैं। और इन बतखों को हमें इनकी शैशवावस्था में ही खरीद लेना चाहिए अर्थात तब ही खरीद लेना चाहिए जब वे शिशु होते हैं। ताकि इन्हें उचित समय पर प्रजनन कराया जा सके। ये शिशु या चूज़े स्वयं डक फ़ार्म से ही खरीदे जा सकते हैं और अधिक से अधिक विक्रेताओं से जुड़ने के लिए आप ऑनलाइन मार्केट में भी डीलर ढूंढ सकते हैं।

ऑनलाइन माध्यमों में इंडियामार्ट, जस्ट डायल, येल्लो पेजेज़ आदि के माध्यम से भी डीलर्स या विक्रेताओं से सीधे जुड़ सकते हैं। इनमें से कुछ माध्यम फ्री हैं तथा कुछ को कुछ फ़ीस का भी भुगतान करना पद सकता है।

बतख पालन व्यवसाय के लिए मशीन व उपकरण

इस व्यवसाय में किसी मशीन की आवश्यकता आमतौर पर नहीं होती परन्तु अंडों व मीट की पैकिंग में एक छोटी-मोटी मशीन व इनके डिस्ट्रीब्यूशन व सप्लाई के लिए एक लोडिंग वहां की आवश्यकता हो सकती है। नवीन व सेकण्ड हैण्ड की सूरत में इस्नका कुल खर्च 50000 से 200000 तक हो सकता है। परन्तु इनके बिना भी यह व्यवसाय किया जा सकता है अगर विक्रेता का या वितरण कर्ता का अपना वाहन हो तो।  

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बतख पालन की विधि

बतख पालन व्यवसाय एक बेहद निश्चिंतता वाला व्यवसाय है। इसमें किसी पेचीदा विधि का अनुसरण नहीं करना होता है। बस बतखों का ही सामान्य देख-रेख व पालन-पोषण होता है। प्रारंभ में चूज़े खरीद कर लाए जाते हैं। अब इन चूज़ों को उचित भोजन देकर पोषित किया जाता है। भोजन के लिए आप इन्हें चावल, मक्का, कोपरा आदि दे सकते हैं।

साथ ही कीट आहार के लिए आप इन्हें खुले स्थान पर खास तौर पर पानी वाली जगह पर घूमने फिरने दें ताकि यहाँ से ये प्राकृतिक जलीय कीट आहार जैसे घोंघा आदि खा लेते हैं।अब वृद्धि होने पर इन्हें प्रजनन कराया जाता है। प्रजनन के पश्चात् इनके अंडों की साज संभाल की जाती है। गर्भ धारण के बाद इन बतखों को अपने आसपास ही नज़र में रखना चाहिए और हो सके तो एक बंद निजी बाड़े या बागीचे में रखें ताकि ये किसी भी समय अंडे दें तो उसे सहेजा जा सके।

अब इन अंडों को एक उचित समय तक सहेज कर इन्हें अंडों की ट्रे में व्यवस्थित कर लेना चाहिए तथा इनकी अच्छी तरह पैकिंग कर ताकि ये फूटे ना; वितरक को हस्तांतरित कर देना चाहिए।

बतख पालन व्यवसाय के लिए स्थान का चयन

बतख पालन के व्यवसाय में कोई विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं होती, जिस तरह की किसी अन्य निर्माण कार्य के लिए होती है। बस बतखों के घूमने फिरने के लिए प्राकृतिक स्थान की आवश्यकता होती है जिसे कि खरीदने या लीज़ पर लेने की कोई आवश्यकता नहीं होती।

परन्तु फिर भी उनके लिए एक निश्चित स्थान होना आवश्यक है ताकि वे अपने शेल्टर से परिचित रहें व लौट कर आ सके। रात में रोकने के लिए भी यह स्थान कामा आता है। सामान्यतया एक बतख को 1.5 से 2.5 वर्गफीट की आवश्यकता होती है। अतः 150-200 बतखों के लिए 1000-1500 वर्गफीट का क्षेत्र काफी होगा।

बतख पालन व्यवसाय के लिए लाइसेंस व पंजीकरण

कोई भी व्यवसाय को करने के लिए उसमें दक्षता का होना आवश्यक है ताकि जन सामान्य को किसी भी प्रकार की हानि ना पहुंचे। अतः सरकार ने एक व्यवसायी कि दक्षता तथा योग्यता व अह्र्ता को सुनिश्चित करने के लिए कुछ लाइसेंस व पंजीकरण को करवाना अनिवार्य किया है।

इन पंजीकरणों के आभाव में न सिर्फ जनता के अहित होने की संभावना होती हैं बल्की व्यवसाय को सुचारु रूप से चलाने में व उसकी वृद्धि में भी कईं प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। तो आइए देखते हैं कि इस क्रम में हमें इस व्यवसाय विशेष में किन-किन लाइसेंसों की व पंजीकरणों की आवश्यकता होगी।

  • उद्योग आधार पंजीकरण
  • ट्रैड्मार्क पंजीकरण
  • जीसटी पंजीकरण
  • ट्रैड लाइसेंस 

यदि आप अंडे व मीट यू ही खुला बेचते हैं तो आपको ट्रेडमार्क पंजीकरण की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और यदि आप बेहद छोटे पैमाने पर यह व्यवसाय कर रहे है जैसे कि 20-30 बतखों के साथ, तो आपको किसी ट्रेड लाइसेंस की भी ज़रुरत नहीं पड़ेगी। परन्तु किसी भी सूरत में आपको अपने व्यवसाय के लिए एक बैंक अकाउंट या करंट अकाउंट अवश्य खोल लेना चाहिए तथा इसे आधार से अवश्य लिंक करवाना चाहिए।

बतख पालन व्यवसाय के लिए स्टाफ

बेहद छोटे स्तर पर आपको बहुत अधिक स्टाफ कि ज़रुरत नहीं होती है परन्तु बड़े स्तर पर अर्थात अगर हज़ारों की मात्र में बतखें होने पर आपको इस व्यवसाय में 2-3 कर्मचारियों कि ज़रुरत अवश्य पड़ सकती है। जो कि बतखों के खान-पान, साफ-सफाई, स्वस्थ्य, अण्डों का रखरखाव, तैयार उत्पाद का वितरण आदि में आपकी मदद करेंगे।

बतख पालन व्यवसाय के लिए पैकेजिंग

बतख पालन के व्यवसाय में एक बहुत ही अच्छी बात यह है कि इसमें हमें कोई विशेष पैकिंग की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि अण्डों को प्लास्टिक में या किसी ओर ढंग से सील पैक नहीं किया जा सकता है। अण्डों को ऐसे मटेरियल से पैक करना चाहिए जिसमें कि हवा पास होती रहे।

अतः इन्हें कागज़ की लुगदी से बने एक विशेष आकृति की ट्रे में पैक किया जाता है जिससे एक तो इसमें हवा का आवागमन बना रहता है और दूसरा उस विशेष आकृति के कारण उसमें अंडे फूटने से बचते तो हैं ही साथ ही टिके भी रहते हैं या यू कहें कि लुड़कते भी नहीं। तथा इस तरह के पैकेट बेहद सादे होते हैं। इनमें ना तो साज-सज्जा की आवश्यकता ही होती है न ही गुंजाइश भी।

इन पैकेट्स में अंडों को जमा कर या व्यवस्थित करके सीधा ही सप्लाई करने के लिए लोडिंग वहां में चढ़ा दिया जाता है तथा दुकानों पर या बाज़ारों पर भी यह इसी रूप में रखा जाता है।

बतख पालन व्यवसाय में लागत

इस व्यवसाय में मुख्य खर्च बतखों के क्रय और उनके खानपान पर ही होता है और इसकी लागत मात्रा पर बहुत हद तक निर्भर करता है, जितनी ज्यादा मात्र होगी लागत उतनी ही कम पड़ेगी।

तो हम यहाँ 500 बतखों का आंकड़ा लेकर चलते हैं। अगर आप 500 बतखें पालते हैं तो इनके चूजे आपको 400-500 रूपए तक देने होंगे। और अगले 4-5 माह तक इनके खाने व रखरखाव पर खर्च करना होगा जो लगभग कुछ 2-3 हज़ार रूपए प्रति माह मान सकते हैं। अब अगर स्थान तथा कर्मचारियों का भी खर्च इसमें जोड़ें तो 500 बतखों की व्यवस्था में लगभग 10-12 हज़ार का खर्च होगा।

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बतख पालन का व्यवसाय में मुनाफा

कच्चे माल के रूप में क्रय किये गए छोटे चूज़े अब परिपक्व बतख बनने के बाद अंडे देने के लिए तैयार हो जाते हैं। ये बतखें अब 4-5 माह के बाद लगभग हरदिन 1 अंडा देने के लिए तैयार है। जो कि कम से कम 7 रूपए में बिकता है। अब अगर सभी 500 बतखें एक-एक अंडा देती हैं तो माह के लगभग 105000/- हो जाते हैं।

अब इनके खाने-पीने और स्थान व कर्मचारियों आदि के खर्च इन 500 बतखों की गणना बारीकी से भी करेंगे तो यह अगर अधिक से अधिक 15000 निकलेगा। तो मोटे तौर पर आपकी अर्निंग 90000 तक होगी। तो देखा आपने कि यह कितने मुनाफे का सौदा है।   

बतख पालन का व्यवसाय के लिए मार्केटिंग

अंडों को बेचने के लिए विशेष मार्केटिंग की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि ये एक प्राकृतिक वस्तु है अतः आपको उपभोक्ता से अपने उत्पाद का न तो परिचय करना होता है और ना ही अपने उत्पाद की गुणवत्ता का विश्वास दिलाना होता है। आपको बस उसके उपभोग के स्थान को पता लगाना होता है तथा मार्केट में प्रतियोगिता का ध्यान रखते हुए सौदा करना होता है।

बतख पालन का व्यवसाय में रिस्क

प्रत्येक व्यवसाय में कम या ज़्यादा कुछ ना कुछ रिस्क तो अवश्य होते है। इस व्यवसाय में भी कुछ रिस्क हैं जिन्हें हम सूची के माध्यम से बता रहे हैं-

  • बतखों को खूंखार या माँसाहारी जानवरों से बचाना चाहिए ताकि वे बताखों को अपना शिकार न बना लें।
  • बतखों के लिए तलब, नाला, पोखर आदि फेवरेबल होता है परन्तु इसमें पड़ी हुई कोई गन्दगी या ज़हरीला पदार्थ खाने से इन्हें बचाना चाहिए व इनके स्वस्थ का ध्यान रखना चाहिए।
  • किसी भी बतख के बीमार होने पर वह बीमारी एनी बताखों को भी लग सकती है अतः ऐसी बतखों को अलग रख कर उन्हें ठीक से उपचारित किया जाना चाहिए।
  • अंडे बहुत ही नाज़ुक होते हैं, ठीक-ठाक व्यवस्था न होने पर व थोड़ी सी भी चूक होने पर कई अंडों का एक साथ नुक्सान हो सकता है।
  • सही समय पर अंडों का विक्रय ना किया जाए तो ये सड़ भी जाते हैं।

ये रिस्क बहुत बड़े रिस्क नहीं हैं क्योंकि थोडा स अतिरिक्त ध्यान रख कर व सूझ-बूझ दिखाकर इन नुकसानों से बचा जा सकता है तथा इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

FAQ

क्या इस बतख पालन के व्यवसाय में किसी भी तरह कि मशीन कि आवश्यकता नहीं होती है? 

मशीन कि आवश्यकता आपके व्यवसाय के कोंसेप्ट पर निर्भर करती है। अगर आप अंडों को सिर्फ  बेचना चाहते हैं तो आपको किसी भी प्रकार कि मशीन की आवश्यकता नहीं होगी। परन्तु यदि आप अंडों का इस्तेमाल रिप्रोडक्शन के लिए अर्थात चूज़े पैदा करने के लिए करते हैं तो आपको इनक्यूबेटर की आवश्यकता होगी जिसकी कीमत बहुत अधिक नहीं होती है।

क्या इस व्यवसाय से इतना मुनाफा हो जाता है कि इसी मुनाफे से इसी व्यवसाय को और भी बढाया  जा सके?

बिलकुल, इस व्यवसाय से आपको लगत का कईं गुना मुनाफा होता है, जिससे आप इस व्यवसाय को  बाधा भी सकते हैं तथा साथ ही साथ अपने जीवन यापन में भी व्यय कर सकते हैं।

एक बतख कितने साल में अंडे देने लायक बन जाती है?

एक बतख सिर्फ 4-5 माह में ही परिपक्व हो जाती हा तथा अंडे देने योग्य बन जाती है।

बूढ़ी होने पर बतख का क्या किया जा सकता है?

बूढ़ी होने पर बतख का मीत बेच कर मुनाफा कमाया जा सकता है।

एक बतख कितने अंडे दे देती है?

एक बतख लगभग एक अंडा प्रतिदिन कि दर से दे देती है। आप साल में कम से कम 290 अंडों की अपेक्षा एक बतख से कर सकते हैं।

निष्कर्ष

तो हमने देखा कि बतख पालन का व्यवसाय कैसे शुरु करें? (Duck Farming Business Plan In Hindi) किस तरह कम से कम लागत तथा कम से कम व साधारण से साधारण व्यवस्था के साथ हम यह व्यवसाय प्रारंभ करके अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

और इस व्यवसाय को चाहे हम किसी भी पैमानें पर करें परन्तु लागत व लाभ का अनुपात लगभग उतना ही रहता है। हालांकी फिर भी ज्यादा से ज्यादा मात्र में बतखें रखने पर अपेक्षाकृत अधिक मार्जिन मिल जाता है।

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