आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर कैसे शुरू करें?

Ayurvedic Medical Store Kaise Khole: आज के इस आर्टिकल  में हम बात करने वाले हैं आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर कैसे शुरू करें? एवं इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि इस बिजनेस को शुरू करने में आने वाली लागत, जोखिम और आवश्यक प्रक्रिया के बारे में।

Ayurvedic Medical Store Kaise Khole
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आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर कैसे शुरू करें? | Ayurvedic Medical Store Kaise Khole

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर क्या होता है?

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर एक प्रकार से दवाइयों का विक्रय करने वाला स्टोर ही होता है। लेकिन इस स्टोर पर केवल आयुर्वेदिक दवाइयां ही बेची जाती हैं। यह एलोपैथी मेडिकल स्टोर के समान ही होते हैं।

वर्तमान समय में लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त होते हैं और इन के उपचार में लोग एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन करते हैं। एलोपैथिक दवाइयों को रासायनिक क्रिया के द्वारा बनाया जाता है। यह दवाइयां दर्द पर जल्दी असर करती है। लेकिन इनके सेवन से अन्य बीमारियां भी शुरू हो जाती हैं जैसे किडनी खराब होना और कुछ बीमारियों में यह असर भी नहीं करती है आदि।

इसलिए वर्तमान समय में लोग आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन ज्यादा करने लगे हैं। क्योंकि आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन से बीमारी को ठीक होने में समय ज्यादा लगता है। लेकिन यह दवाइयां बीमारी को जड़ से खत्म कर देती हैं और इनके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं। प्राचीन समय में लोग आयुर्वेदिक दवाइयों के द्वारा ही उपचार करते थे और एक अच्छी स्वस्थ लंबी आयु को प्राप्त होते थे।

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलने की प्रक्रिया

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर को कोई भी व्यक्ति आसानी से खोल सकता है। क्योंकि इसके लिए आपको ड्रग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा भी आप यूनानी व हर्बल दवाओं का विक्रय भी कर सकते हैं। इन सब में भी आपको लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है।

मेडिकल स्टोर खोलने के लिए आपके पास फार्मा की डिग्री होना आवश्यक है। इस डिग्री को आप 12वीं पास करने के बाद प्राप्त कर सकते हैं। आपके मेडिकल स्टोर में फायर एक्सटेंशन होना बहुत आवश्यक है।

यदि आप अपने मेडिकल स्टोर में आयुर्वेदिक मेडिसन के साथ-साथ एलोपैथिक दवाइयां भी रखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको ड्रग लाइसेंस लेना जरूरी होगा।

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लाइसेंस हेतु आवश्यक दस्तावेज

मेडिकल स्टोर खोलने के लिए आपको लाइसेंस की आवश्यकता होती है, जिनमें निम्नलिखित दस्तावेज आपके पास होना आवश्यक है। यदि आप मेडिकल स्टोर अपने स्वयं की जमीन पर खोलना चाहते हैं तो उसके लिए आपके पास जमीन के पेपर होना चाहिए और यदि आप किराए से दुकान लेकर खोलना चाहते हैं तो आपके पास किरायानामा होना चाहिए।

  • इसके अलावा आपके पास दो पासपोर्ट साइज फोटो होना चाहिए, आधार कार्ड एवं मतदाता पत्र भी आवश्यक है।
  • डिग्री की यदि बात की जाए तो डी फार्मा (डिप्लोमा इन फार्मेसी) एवं बी फार्मा (बैचलर ऑफ फार्मेसी) या फिर एम फार्मा (मास्टर ऑफ फार्मेसी) की डिग्री होना आवश्यक है।
  • इनकम टैक्स रिटर्न फाइल की प्रतिलिपि भी होना चाहिए।
  • नगर निगम अथवा नगर पालिका से प्रमाणित बिजनेस प्रमाण पत्र भी आवश्यक है।
  • वर्तमान समय में जीएसटी, इनकम टैक्स रिटर्न की फाइल की कॉपी भी जरूरी होती है।

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर लाइसेंस कैसे प्राप्त करें?

आयुर्वेदिक मेडिकल खोलने के लिए लाइसेंस हेतु आपके पास फॉर्मेसी की डिग्री का फॉर्म आफ काउंसिल में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य होता है। इस रजिस्ट्रेशन के पश्चात आपको केंद्र एवं राज्य औषधि मानक नियंत्रण संगठन मे मेडिकल लाइसेंस हेतु रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है।

इसके पश्चात फायर एक्सटेंशन, नगर निगम या नगर पालिका वर्ग, जीएसटी दस्तावेज आदि पूर्ण होने के पश्चात आप आयुर्वेदिक मेडिकल लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। दस्तावेज पूर्ण होने के बाद आप आवेदन पत्र को भरकर लिखित आवश्यक दस्तावेज को जमा करना होगा एवं जो भी लाइसेंस राशि दी गई है, उसको ऑनलाइन या ऑफलाइन के माध्यम से भुगतान करना होगा।

आवेदन पत्र की जांच करने के बाद यदि सभी दस्तावेज पूरे होते हैं तो आपको एक निश्चित समय सीमा के अंदर लाइसेंस प्रदान कर दिया जाता है। लाइसेंस मिलने के पश्चात ही आप इस मेडिकल को खोल सकते हैं।

लाइसेंस के प्रकार

मेडिकल के लिए लाइसेंस दो प्रकार से जारी किए जाते हैं।

  • रिटेल ड्रग लाइसेंस: यदि आप दवाइयों को रिटेल के माध्यम से अर्थात फुटकर रूप में सीधे ग्राहक को बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आपको रिटेल ड्रग लाइसेंस की आवश्यकता होगी।
  • होलसेल ड्रग लाइसेंस: यदि आप दवाइयों का विक्रय होलसेल के रूप में अर्थात थोक रूप में करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको होलसेल ड्रग लाइसेंस की आवश्यकता होगी।

मेडिकल स्टोर हेतु किया जाने वाला कोर्स

  • डी फार्मा – इसका अर्थ होता है डिप्लोमा इन फार्मेसी। यह 2 वर्ष का कोर्स होता है। इसको करने के बाद भी आप मेडिकल स्टोर खोल कर सकते हैं।
  • बी फार्मा – इसका अर्थ होता है बैचलर ऑफ फार्मेसी। यह कोर्स 3 साल का होता है, जिसमें आपको स्नातक की डिग्री प्राप्त होती है।
  • एम फार्मा – इसका मतलब होता है मास्टर ऑफ फार्मेसी। यह 2 वर्ष का कोर्स होता है, जोकि बी फार्मा के बाद किया जाता है। इसमें आपको फॉर्मेसी में मास्टर की डिग्री प्राप्त होती है।

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलने मे लागत

आयुर्वैदिक मेडिकल स्टोर को खोलने के लिए यदि लागत की बात की जाए तो यह लागत दो बातों पर निर्धारित होती है। यदि आप दवाइयों के विक्रेता बनना चाहते हैं तो इसमें लागत कम आती है। आप 3 से ₹400000 की लागत के साथ मेडिकल खोल सकते हैं।

अपने बिजनेस को सक्सेसफुल बनाना चाहते हैं तो इस हेतु आप लागत बढ़ा भी सकते हैं, जिसमें आप मेडिकल का इंटीरियर डिजाइन कर सकते हैं। लेकिन यदि आप मेडिकल में होलसेल विक्रेता बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको लागत अधिक आएगी जो कि लगभग 13 से 14 लाख रुपए होगी।

इस व्यवसाय में आपको प्रॉफिट भी अधिक होता है एवं मार्जिन भी अधिक होता है। यानी आप 30 से 40% तक मार्जिन कमा सकते हैं।

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स्टाफ की भर्ती

आयुर्वेदिक मेडिकल खोलने के लिए आपको स्टाफ की भी भर्ती करनी होगी। स्टाफ की भर्ती करते समय आपको ध्यान रखना होगा कि नियुक्त व्यक्ति को दवाओं का आवश्यक ज्ञान हो और वह ग्राहकों के मांग के हिसाब से उन्हें दवाइयां दे सके।

क्या बिना डिग्री के आयुर्वेदिक मेडिकल खोल सकते हैं?

सामान्यतया मेडिकल खोलने के लिए आपको डिग्री लेना आवश्यक है। लेकिन यदि आप मेडिकल में बहुत अधिक समय से कार्य कर रहे हैं। लगभग 10 साल से तो यदि आपके पास 10 साल से अधिक का अनुभव है तो आप अपना मेडिकल खोल कर रख सकते हैं। नहीं तो आपको अपना मेडिकल बंद करना होगा और यदि आपके पहचान में या सगे संबंधी के पास डिग्री है तब भी आप मेडिकल खोल कर रख सकते है।

स्थान का चयन

आयुर्वेदिक मेडिकल खोलने के लिए आपको एक अच्छे स्थान की आवश्यकता होगी, जहां से व्यक्ति आसानी से आपके मेडिकल तक पहुंच सके। मेडिकल के आस-पास यदि चिकित्सालय हैं तो इसके और भी अधिक फायदे होंगे। स्थान साफ सुथरा एवं आवागमन के साधन पर्याप्त होने चाहिए, जिससे ग्राहकों को आसानी हो।

आयुर्वेदिक मेडिकल में फायदे

वर्तमान समय में मेडिकल सुविधाएं बढ़ती जा रही है। रोज नई-नई बीमारियों का विकास हो रहा है। कई संक्रामक रोग फैल रहे हैं। ऐसे में व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए एलोपैथिक दवाओं की जगह आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग करता है। क्योंकि इन दवाओं के सेवन से शरीर पर कोई भी हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है, जिस कारण आयुर्वेदिक दवाओं की मांग निरंतर बाजार में बढ़ती जा रही है।

आयुर्वेदिक दवाओं की कीमत भी अधिक होती है, जिस वजह से इन पर मार्जिन भी बहुत अधिक होता है और आयुर्वेदिक मेडिकल खोलने वाले व्यक्ति इससे अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग व लाभ

आयुर्वेदिक दवाएं ऐसी दवाएं हैं, जो एक लंबे समय के बाद असर दिखाना शुरू करती हैं। एलोपैथिक दवाएं तुरंत ही असर दिखाती हैं लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। लेकिन आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है और यह लंबे समय तक शरीर पर प्रभाव करती हैं और बीमारी को जड़ से खत्म करती हैं।

प्राचीन काल में भी हमारे यहां आयुर्वेदिक दवाओं से ही उपचार किया जाता था। भारत में यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो कि वर्तमान समय में फिर से प्रचलन में आ गई है और व्यक्ति इसकी बहुत अधिक मांग करते हैं, जिससे इनकी डिमांड बढ़ गई है।

आयुर्वेदिक मेडिकल में जोखिम

जोखिम प्रत्येक व्यवसाय का अभिन्न अंग है। अन्य व्यवसायों की तरह इस व्यवसाय में भी जोखिम होती है। क्योंकि आयुर्वेदिक दवाएं एलोपैथिक की तुलना में महंगी होती है तो कई बार ग्राहक इन्हें खरीदने से कतराते हैं। लेकिन यह दवाई वर्तमान समय में बहुत अधिक मांग में है और इनके सकारात्मक परिणाम है, जिस वजह से व्यक्ति इन्हें अवश्य ही खरीदते हैं।

FAQ

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलने के लिए कितने इन्वेस्टमेंट की जरूरत पड़ती है?

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलने के लिए आप को न्यूनतम ₹3 लाख से लेकर ₹4 लाख तक का इन्वेस्टमेंट करना होगा। इसके पश्चात यदि आप बड़ा कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो ऐसे में आपको ज्यादा इनवेस्टमेंट देने की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलने के लिए कौन-कौन से डिप्लोमा की जरूरत पड़ती है?

जब भी कोई व्यक्ति आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलना चाहता है तो वह व्यक्ति को सबसे पहले डी फार्मा, बी फार्मा का सर्टिफिकेट लेना होगा, उसके पश्चात एम फार्मा डिग्री भी लेना अनिवार्य है।

क्या आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है?

जी हां, आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर खोलने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। यदि आप रिटेल बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको रिटेल ड्रग लाइसेंस लेना होगा और यदि आप होलसेल बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको होलसेल ड्रग लाइसेंस लेना अनिवार्य है।

डी फार्मा डिप्लोमा कितने साल का होता है?

डी फार्मा डिप्लोमा 2 साल का होता है। 2 साल की अवधि में आप यह सर्टिफिकेट हासिल कर सकते हैं।

बी फार्मा डिप्लोमा कितने साल का होता है?

बी फार्मा डिप्लोमा 3 साल का होता है। बी फार्मा डिप्लोमा लेने के लिए विद्यार्थी को 3 साल तक कॉलेज जाकर सर्टिफिकेट हासिल करना होगा।

बिना डिप्लोमा मेडिकल स्टोर कैसे खोलें?

दोस्तों वर्तमान समय में कोई भी मेडिकल स्टोर खोलने के लिए आपको सबसे पहले मेडिकल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। परंतु यदि कोई उम्मीदवार लंबे समय से मेडिकल क्षेत्र में काम कर रहा है। लंबे समय का मतलब यदि किसी व्यक्ति ने 10 साल से अधिक वर्षों तक मेडिकल में कार्य किया है और मेडिकल के सभी वस्तुओं का अनुभव है, तो ऐसे में व्यक्ति बिना डिप्लोमा मेडिकल स्टोर खोल सकता है।

निष्कर्ष

आज के इस आर्टिकल में हमने बात की आयुर्वेदिक मेडिकल को शुरू करने के बारे में (Ayurvedic Medical Store Kaise Khole), इस व्यवसाय में लागत, जोखिम क्या होते हैं और किन-किन प्रक्रियाओं से होकर हम आयुर्वेदिक मेडिकल का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

उम्मीद है कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और यदि आप आयुर्वेदिक मेडिकल शुरू करना चाहते हैं तो आपके सभी प्रश्नों के उत्तर आज के इस आर्टिकल से आपको मिले होंगे।

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